देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी में संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज एवं नवाचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज की परम प्रभावक शिष्या आर्यिका रत्न 105 श्री पूर्णमति माताजी ससंघ का मंगल चातुर्मास श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हो रहा है। माताजी के श्रीमुख से प्रतिदिन प्रवाहित हो रही धर्म, ज्ञान एवं अध्यात्म की अमृतमयी देशना से धर्मप्रेमी श्रद्धालु लाभान्वित हो रहे हैं। इसी पावन अवसर पर आर्यिका रत्न श्री पूर्णमति माताजी ससंघ के मंगल सानिध्य, प्रेरणा एवं आशीर्वाद से गांधी रोड स्थित श्री दिगंबर जैन पंचायती जैन मंदिर परिसर में समवशरण महामंडल विधान का भव्य आयोजन किया जा रहा है।
विधान के अंतर्गत भगवान के दिव्य समवशरण की प्रतीकात्मक मंडल रचना कर विधि-विधानपूर्वक जिनेंद्र भगवान की पूजा-अर्चना, अर्घ्य समर्पण एवं गुणगान किया जा रहा है। आयोजन में बड़े और छोटे, दो प्रकार के मंडलों की व्यवस्था की गई है, जिनके माध्यम से श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं। विधान के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण, धार्मिक मंत्रोच्चार और जिनेंद्र भगवान की जय-जयकार से गुंजायमान हो रहा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन सम्मिलित होकर प्रभु की आराधना कर पुण्यार्जन कर रहे हैं।
समवशरण महामंडल विधान से मिलता है समता और आत्मकल्याण का संदेश
जैन धर्म में समवशरण महामंडल विधान का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। समवशरण तीर्थंकर भगवान के केवलज्ञान प्राप्त होने के पश्चात स्थापित होने वाली उस दिव्य धर्मसभा का प्रतीक है, जहां भगवान की दिव्य देशना सुनने के लिए देव, मनुष्य और तिर्यंच जीव एकत्रित होते हैं। भगवान की वाणी सभी जीवों को समता, अहिंसा, करुणा और आत्मकल्याण का मार्ग दिखाती है। इस विधान में समवशरण की विभिन्न भूमियों, मानस्तंभ, चैत्य प्रासाद, उपवन एवं अन्य दिव्य संरचनाओं की प्रतीकात्मक मंडल रचना की जाती है। श्रद्धालु विधिपूर्वक जिनेंद्र भगवान की पूजा-अर्चना कर उनके अनंत गुणों का स्मरण करते हैं।
जैन मान्यताओं के अनुसार, इस प्रकार की आराधना आत्मशुद्धि, कर्मनिर्जरा और पुण्यार्जन की भावना को प्रबल करती है। यह विधान मनुष्य को अहंकार का त्याग कर समता भाव अपनाने, आत्मचिंतन करने और मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। आर्यिका रत्न श्री पूर्णमति माताजी के मंगल प्रवचनों से श्रद्धालु धर्म के गूढ़ सिद्धांतों को आत्मसात कर रहे हैं। माताजी का आध्यात्मिक मार्गदर्शन भक्तों को संयम, सदाचार, करुणा और आत्मकल्याण के पथ पर चलने की प्रेरणा दे रहा है।
11 से 18 अक्टूबर तक चलेगा धार्मिक अनुष्ठान
आयोजन की जानकारी देते हुए मीडिया समन्वयक मधु जैन ने बताया कि आर्यिका रत्न 105 श्री पूर्णमति माताजी ससंघ के मंगल सानिध्य एवं आशीर्वाद में समवशरण महामंडल विधान 11 अक्टूबर से 18 अक्टूबर 2026 तक प्रतिदिन श्री दिगंबर जैन पंचायती जैन मंदिर प्रांगण, गांधी रोड, देहरादून में आयोजित किया जा रहा है। आयोजन में स्थानीय जैन समाज के साथ-साथ अन्य स्थानों से आने वाले श्रद्धालु भी उत्साहपूर्वक सहभागिता कर रहे हैं।
इस पावन अनुष्ठान में बड़े मंडल के धर्मलाभार्थियों के रूप में अर्चना जैन, दीपा जैन (पारस टॉवर); सुखमाल चंद जैन एवं रचना जैन (नेहरू कॉलोनी); अमित जैन एवं दीपा जैन (सौरभ सागर छाया); दिनेश जैन एवं बबीता जैन (रोचिपुरा); आशीष जैन एवं सीमा जैन, सुनीता जैन (राजेंद्र नगर); अलका जैन एवं ममता जैन (कर्जन रोड) तथा कमलेश जैन, धर्मपत्नी विनोद जैन (राजपुर) ने धर्मलाभ प्राप्त किया।
छोटे मंडल के धर्मलाभार्थियों में जनेश्वर दास एवं अंकित जैन (पार्श्वनाथ ज्वेलर्स), प्रतिभा जैन एवं मुकुल जैन (रोचिपुरा), श्रेयांस जैन (सहारनपुर), मुदित जैन एवं सिद्धार्थ जैन, प्रभु समर्पण समिति, गौरव जैन एवं रेशु जैन (कैनाल रोड), रानी प्रवीण जैन (चमन विहार), रूपा जैन (बल्लीवाला), आभा जैन (देहराखास), नरेश चंद जैन एवं ममलेश जैन (आनंद चौक), देव जैन एवं प्रिया जैन (त्यागी रोड), सुधीर जैन, विनय जैन एवं पंकज जैन (नेशनल बुक डिपो), प्रदीप जैन एवं विनीता जैन तथा रंजना जैन (देहराखास), जैन मिलन राजुल, इंदु जैन एवं वैभव जैन (चमन विहार), अचला जैन एवं आयुष जैन (एसीसी सीमेंट, तिलक रोड), आशु जैन (मालवीय रोड), महिला जैन मिलन ‘मनुवृति’, झंडा जैन मंदिर, णमोकार मंत्र, मंजू जैन (नेताजी मोहल्ला), जैन मिलन महावीर, राकेश जैन (माजरा), कमलेश जैन एवं संगीता जैन (नेहरू कॉलोनी), डॉली जैन (राजेंद्र नगर), रुचि जैन, सिद्धार्थ जैन एवं पारुल जैन (लक्की सीमेंट), महिला मंडल माजरा, संदीप जैन (बीकानेर वाले) एवं श्रीमती रजनी जैन (लक्ष्मण चौक), वीना जैन एवं परिवार (जैन कॉलोनी), वंदना जैन एवं परिवार (लक्ष्मण चौक) तथा संध्या जैन (चमन विहार) शामिल हैं।इस अवसर पर सकल दिगंबर जैन समाज, देहरादून, श्री विद्या समय पूर्ण वर्षायोग समिति 2026, जैन भवन कार्यकारिणी के पदाधिकारी एवं सदस्य तथा विभिन्न जैन संस्थाओं के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी श्रद्धालु उपस्थित रहकर जिनेंद्र भगवान की आराधना में सहभागी बन रहे हैं। संपूर्ण आयोजन श्रद्धा, संयम, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार का माध्यम बन रहा है।
