देहरादून। साहस, रोमांच, अनुशासन और टीम भावना का शानदार प्रदर्शन करने के उद्देश्य से आर्मी सर्विस कोर के व्हाइट वॉटर राफ्टिंग एक्सपीडिशन-2026 का मंगलवार को देहरादून से शुभारंभ हुआ। मेजर जनरल पी.के. तिवारी, एम.जी.ए.एस.सी., मध्य कमान ने 16 सदस्यीय अभियान दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
7 से 11 अक्टूबर तक चलने वाले इस साहसिक अभियान में जवान अलकनंदा और गंगा की चुनौतीपूर्ण धाराओं के बीच करीब 145 किलोमीटर की रोमांचक नदी यात्रा पूरी करेंगे। अभियान दल में दो अधिकारी, दो जूनियर कमीशंड अधिकारी और 12 अन्य रैंक के सैन्यकर्मी शामिल हैं।
अभियान की वास्तविक शुरुआत 7 अक्टूबर को रुद्रप्रयाग से होगी। पांच चरणों में पूरी होने वाली इस जलयात्रा में दल रुद्रप्रयाग से धारी देवी मंदिर, धारी देवी मंदिर से श्रीनगर, श्रीनगर से देवप्रयाग, देवप्रयाग से कौड़ियाला और अंत में कौड़ियाला से ऋषिकेश पहुंचेगा। अभियान का समापन 11 अक्टूबर को ऋषिकेश में होगा।
अलकनंदा से गंगा की तेज धाराओं तक चुनौतीपूर्ण सफर राफ्टिंग दल अलकनंदा नदी की तेज और चुनौतीपूर्ण धाराओं को पार करते हुए देवप्रयाग पहुंचेगा। यहां अलकनंदा और भागीरथी के संगम के बाद नदी गंगा के रूप में आगे बढ़ती है। इसके बाद दल गंगा की तीव्र जलधाराओं का सामना करते हुए कौड़ियाला से ऋषिकेश तक अपनी रोमांचक यात्रा पूरी करेगा।
गहन प्रशिक्षण के बाद मैदान में उतरे राफ्टर्स
अभियान के लिए स्वयंसेवकों से आवेदन आमंत्रित किए गए थे। चयन प्रक्रिया के बाद 16 सदस्यीय दल का गठन किया गया। चयनित जवानों ने 21 सितंबर से 3 अक्टूबर तक ए.ए.एन.सी., रायवाला में श्वेत जल नौकायन का बुनियादी एवं गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया। कठिन प्रशिक्षण के बाद दल के सदस्य चुनौतीपूर्ण नदी अभियान के लिए पूरी तरह तैयार हैं। आर्मी सर्विस कोर का पिछला श्वेत जल नौका अभियान वर्ष 2022 में उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में आयोजित किया गया था। इसके बाद विभिन्न इकाइयों में कार्मिकों की नियुक्तियों के चलते करीब पांच वर्ष तक इस तरह का अभियान आयोजित नहीं हो सका।
महानिदेशालय आपूर्ति एवं परिवहन की पहल पर इस साहसिक परंपरा को दोबारा शुरू किया गया है। अभियान के संचालन की जिम्मेदारी मध्य कमान को तथा जमीनी स्तर पर आयोजन का दायित्व 514 आर्मी सर्विस कोर बटालियन को सौंपा गया है। यह अभियान सैन्यकर्मियों की साहस, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, शारीरिक-मानसिक दृढ़ता और टीम भावना की परीक्षा लेगा। साथ ही, दुर्गम एवं चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सामूहिक रूप से लक्ष्य हासिल करने की सैन्य क्षमता का भी प्रदर्शन होगा।
