देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में शुक्रवार को सचिवालय में व्यय वित्त समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में विभिन्न विभागों के प्रस्तावों पर विचार-विमर्श करते हुए समिति ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को संस्तुति प्रदान की। इस दौरान मुख्य सचिव ने परियोजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, लागत नियंत्रण और ऊर्जा दक्षता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने पंपिंग आधारित पेयजल योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव को अधिक किफायती और टिकाऊ बनाने के लिए सोलर ऊर्जा के उपयोग की संभावनाएं अनिवार्य रूप से तलाशने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि सभी नई पंपिंग पेयजल परियोजनाओं में सोलराइजेशन को प्रस्ताव का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए। साथ ही, नियोजन विभाग को इस संबंध में शासनादेश जारी करने के निर्देश भी दिए। बैठक में उन्होंने विभागों द्वारा कंसल्टेंट्स को परियोजना लागत के प्रतिशत के आधार पर भुगतान किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूर्व में जारी निर्देशों के अनुरूप कंसल्टेंट्स को एकमुश्त (लमसम) फीस का भुगतान सुनिश्चित किया जाए तथा संबंधित शासनादेश सभी विभागों को पुनः भेजा जाए।
मुख्य सचिव ने परियोजनाओं की लागत में अप्रत्याशित वृद्धि के मामलों को गंभीरता से लेने के निर्देश देते हुए कहा कि गलत लागत आकलन करने वाली एजेंसियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने नियोजन विभाग को लोक निर्माण विभाग के सहयोग से कॉस्ट वेरिएशन संबंधी विस्तृत गाइडलाइन तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि परियोजनाओं की लागत में अनावश्यक वृद्धि पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके। बैठक में उन्होंने प्रदेश में आयुष क्षेत्र की व्यापक संभावनाओं का उल्लेख करते हुए गुणवत्तापूर्ण परियोजनाएं तैयार करने और उनकी उपयुक्त लोकेशन का चयन करने पर जोर दिया।
गरुड़ (बागेश्वर) में प्रस्तावित आईटीआई के लिए छात्रावास की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि इससे दूरदराज के विद्यार्थियों को प्रवेश लेने में सुविधा मिलेगी। बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, श्रीधर बाबू अद्दांकी, सी. रविशंकर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं संबंधित विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।